नम आंखों से किया मौला अली को याद
हर पल न्यूज़ ब्यूरो सहसवान। 21 में रमजान को इमाम बारगाह हुसैनी मंजिल सहसवान में मौला अली की शहादत को लेकर एक महफिल का इनकाद हुआ जिसमें मौला अली की जिंदगी से जुड़े कुछ पहलुओं को लोगों को बताया गया वैसे तो पूरी दुनिया मौला अली की शहादत को याद करती है लेकिन बदायूं के कस्बा सहसवान में एक महफिल का आगाज हुआ और उनकी याद में कुरान खानी व रोजा इफ्तार के साथ साथ नयाजो नजर करके मौला अली से जुड़े किस्से को बताया गया और कहा गया कि मौला अली पैगंबर मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम के जानशीन चचेरे भाई एवं दामाद भी थे सुन्नी समुदाय के लोग मौला अली को अपना चौथा खलीफा मानते हैं मौला अली का एक खलीफा के तौर पर शासन काल 4 साल का था एक समाज के भ्रष्ट लोगों ने इब्ने मुलजिम नामक व्यक्ति को खरीदा और हजरत अली की हत्या करने का आदेश दिया 19 में रमजान की सुबह हजरत अली कूफ़े की मस्जिद में नमाज पढ़ रहे थे जैसे ही वह सजदे में गए तभी इब्ने मुलजिम ने जहर में डूबी तलवार से हजरत अली पर प्रहार किया जिससे वह बुरी तरह जख्मी हो गए जिसके कारण 21 वें में रमजान को उनकी शहादत हो गई हर साल 21वें रमजान को हजरत अली के चाहने वाले शोक मनाते हैं जुलूस और मजलिस का आयोजन करते हैं मोहम्मद यूसुफ नियाजी प्रबंधक इमाम बारगाह हुसैनी मंजिल सहसवान ने बताया कि हमारा अहले खानदान सहसवान में बड़े अदबो एहतराम के साथ मौला अली की शहादत को याद करता है और हमारे ऊपर सरपरस्ती खानकाह ए नियाजिया बरेली शरीफ तथा किबला शाह नियाजिया बे नियाज़ साहब की है।
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