आमिर अंसारी ने रामेश्वर यादव से मिलीभगत करके कराई जमानत ,मुसलमानों ने आमिर को बताया " कलंक"
हर पल न्यूज़ ब्यूरो बदायूँ । आमिर अंसारी ने गुस्ताख ए रसूल रामेश्वर यादव की जमानत में मदद की है इसके सबूत मिलते जा रहे हैं पहले आमिर अंसारी ने रामेश्वर के खिलाफ 1 नवंबर को मुकदमा कायम कराया तथा तुरन्त फेसबुक पर एफआई आर की कॉपी डाली । मुसलमानों का फर्जी हमदर्द बनने की कोशिश की ।
बाद में जब आमिर अंसारी पर दबाव पड़ने लगा तब उन्होंने रामेश्वर यादव की मदद करने का वायदा कर लिया इसी क्रम में आमिर अंसारी ने सामान्य धारा 506 का मुकदमा रामेश्वर यादव के खिलाफ पुलिस से मिलकर लिखवाया। जिसमें आमिर ने बताया रामेश्वर यादव अपने दो साथियों के साथ आमिर अंसारी के घर पर आया उन्हें जान से मारने की धमकी दी।
जब नई सराय में आमिर अंसारी के पड़ोस के लोगों का से हमारे पत्रकार साथी ने बात की तो उनका कहना है ऐसी कोई घटना नई सराय में नहीं हुई है।
मुसलमानों का कहना है आमिर अंसारी ने यह झूठा मुकदमा रामेश्वर यादव की मदद करने के लिए लिखवाया है जिस मुकदमे में रामेश्वर ने हुजूर की शान में गुस्ताखी की थी उस मुकदमे में हाईकोर्ट से स्टे रामेश्वर को कराने में आमिर ने आर्थिक समझौता किया है।
अब सवाल ये उठता है आमिर अंसारी हर दिन फेसबुक पर पोस्ट व कमेंट लिखते हैं जब अगर आमिर को रामेश्वर यादव ने धमकी दी थी तब उन्होंने 16 नवंबर को रामेश्वर के खिलाफ 506 का मुकदमा लिखवाया यह बात आमिर ने अखबारों में क्यों नहीं छपवाई। आमिर अंसारी ने फेसबुक या व्हाट्सएप के माध्यम से मुसलमानों को क्यों नहीं बताया ।वह नई सराय के मेंबर भी रह चुके हैं उन्होंने नई सराय के किसी भी शख्स से इस बात का जिक्र क्यों नहीं किया ।आखिर आमिर ने इस मामूली मुकदमे को 16 नवंबर को लिखवाया इसे छुपाकर क्यों रखा ।इसलिए दाल में कुछ काला नहीं बल्कि पूरी दाल ही काली नजर आती है आमिर अंसारी के इसी मामूली मुकदमे का लाभ पुलिस ने रामेश्वर यादव को सोची समझी साजिश के तहत दिया जिस कारण राजेश्वर यादव को जेल नहीं जाना पड़ा।
आमिर ने पूरे जिले के मुसलमानों के साथ विभीषण का रोल अदा किया है।
अब आमिर अंसारी के इस कृत्य से पूरे जिले के मुसलमान आमिर अंसारी पर लानत भेज रहे हैं जिले के मुसलमानों का कहना है कि आमिर अंसारी मुसलमान के नाम पर कलंक है । यह एक नेता की गुलामी में यह भी भूल गए कि वह एक मुसलमान भी हैं ठेकेदारी व पद के लालच ने आमीरा को इतना अंधे कर दिया। आज मुसलमान इन्हें "यजीद" के रूप में देखने लगे हैं।


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